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स्वामी जी ने बड़े ही सहज भाव से उत्तर दिया -” मेरा मस्तिष्क अपने कार्य में इतना व्यस्त था कि मैंने आपकी बातें तो सुनी मुझे ऐसा लगा कि जरूर कुछ बातें हो रही है परंतु उन पर ध्यान देने और उनका बुरा मानने का मुझे अवसर ही नहीं मिला। “

भारत इंग्लैंड की अधीन था। इस प्रसंग में स्वामी विवेकानंद की महानता का बड़ा ही प्रसंशनीय  व अद्भुत वर्णन किया गया है आइए जानते है कि क्या है स्वामी विवेकानंद जी की महानता?