Author: Archana Dwivedi

I’m Archana Dwivedi - a dedicated educator and founder of an educational institute. With a passion for teaching and learning, I strive to provide quality education and a nurturing environment that empowers students to achieve their full potential.

आज 13 अक्टूबर को   पापांकुशा  एकादशी मनाई जा रही है।इस दिन भगवान विष्‍णु के पद्मनाभ स्‍वरूप की पूजा की जाती है। आश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है।

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माता दुर्गा का यह स्वरूप सिद्ध और मोक्ष देने वाला है इसलिए माता को मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। इनकी पूजा अर्चना करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है

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भक्त पवित्रता, शांति और मातृत्व का आशीर्वाद पाने के लिए महागौरी की पूजा करते हैं। इस पोषण करने वाले रूप में, वह दिव्यता, दया और करुणा का प्रतीक है। उनकी पूजा करने से भक्तों को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

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आज नवरात्रि का सातवां दिन है सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां कालरात्रि की आराधना करने से भक्त सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है मां कालरात्रि को कालों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। सनातन धर्म में नवरात्र का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नवरात्र का आरंभ 03 अक्टूबर से हुआ है और इसका समापन 12 अक्टूबर को होगा। इस दौरान माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत का आयोजन विभिन्न दिनों में किया जाता है। सप्तम देवी मां कालरात्रि का मंत्र मां कालरात्रि की पूजा के दिन…

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कात्यायनी माता नवरात्रि की छठी शक्ति हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। वह भगवान शिव की पत्नी और भगवान कार्तिकेय की माता हैं। कात्यायनी माता की महिमा अपरंपार है और वह अपने भक्तों को शक्ति, साहस, और ज्ञान प्रदान करती हैं।

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मां दुर्गा के नौ रूपों में से पांचवा रूप स्कंदमाता का है। इस रूप में, मां दुर्गा अपने पुत्र भगवान स्कंद (कार्तिकेय) के साथ विराजमान हैं। स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि के पांचवे दिन की जाती है। कथा -: स्कंदमाता की कथा भगवान स्कंद की जन्म कथा से जुड़ी हुई है। भगवान स्कंद भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। उनका जन्म तरकासुर नामक असुर का वध करने के लिए हुआ था। स्कंदमाता ने भगवान स्कंद को अपना पुत्र बनाकर उनकी माता की भूमिका निभाई। पूजा करने की विधि -: सामग्रीस्कंदमाता की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन…

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मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी कहा जाता है। उनकी आठ भुजाएं हैं। मां कूष्मांडा के हाथों में धनुष, बाण, कमल पुष्प, चक्र, गदा, कमंडल, जप माला और अमृकपूर्ण कलश कहता है। मां कुष्मांडा सिंह की सवारी करती है।

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देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ है। 

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आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। आज के दिन नवो  देवी माताओ में मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है।आज के दिन  मां ब्रह्मचारिणी की विधि विधान से पूजा की जाएगी। उनकी आरती की जाएगी और मां का पसंदीदा भोग लगाया जाएगा। मां का यह स्‍वरूप श्‍वेत वर्ण का है।

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