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आज यानी 10 अप्रैल को नवरात्रि का दूसरा दिन है।       वहीं इस दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा- अर्चना की जाती है।  चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से शुरू हो गए हैं ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य है -‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या है और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली यानी तप का आचरण करने वाली देवी। 

नवरात्रि की प्रतिदिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन सबसे पहले कलश स्थापना करके माता का आवाहन किया जाता है उसके पश्चात पूजा अर्चना आदि किया जाता है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।

इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या 8 अप्रैल 2024 को मनाई जा रही है। सोमवती अमावस्या पर मुख्य रूप से माता पार्वती और भोलेनाथ की पूजा की जाती है।

धार्मिक ग्रंथो में एकादशी का महत्व विशेष तौर पर माना गया है। एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा का माहात्म्य है।एकादशी पर व्रत और दान के साथ ही भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से हर तरह की परेशानियां और जाने-अनजाने में किए गए पाप खत्म हो जाते हैं।

हिंदू पंचांग के अंतर्गत प्रत्येक माह की 11वीं तीथि को एकादशी कहा जाता है। एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित तिथि माना जाता है। एक महीने में दो पक्ष होने के कारण दो एकादशी होती हैं, एक शुक्ल पक्ष मे तथा दूसरी कृष्ण पक्ष मे।
20 मार्च 2024 को आमलकी एकादशी मनाई जा रही हैं। एकादशी में विशेष तौर पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। विष्णु जी की पूजा करने से हजारों करोड़ व्रत करने का पुण्य प्राप्त होता है

जिस प्रकार से 16 सोमवार के व्रत की कथा होती है उसी प्रकार से सोमवार व्रत की कथा भी होती है। जो कोई भी सोमवार का व्रत करता है भोलेनाथ उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और सदैव अपने भक्त की  उसकी रक्षा करते हैं  आईए जानते हैं कि क्या है सोमवार की व्रत कथा…

जो व्यक्ति शिवरात्रि के दिन शिव जी और माता पार्वती का व्रत रखता है एवं विधि विधान से उनकी पूजा आराधना भक्ति भाव से करता है भगवान उनके सभी मनोरथ पूर्ण करतें हैं और और माता पार्वती अपने भक्त को  सुख समृद्धि  और सौभाग्य प्रदान करते हैं।

एक बार की बात हैं भगवान शंकर और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर बैठे थे तो पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?’ उत्तर में शिवजी ने पार्वती को ‘शिवरात्रि’ के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई-

साल में 12 शिवरात्रि होती है, परंतु इन 12 शिवरात्रियों में फाल्गुन महीने की शिवरात्रि का विशेष महत्त्व है। जिसके कारण इसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ही माता एकादशी की उत्पत्ति हुई थी। इस दिन देवी एकादशी श्रीहरि विष्णु के अंश से जन्मीं थीं और उन्होंने मुर नाम के राक्षस का संहार किया था। ये व्रत साधक की तमाम मनोकामना को पूर्ण करता है।