ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी अपरा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस साल अपरा एकादशी 2…
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मंगलवार का दिन हनुमानजी को समर्पित होता है। लेकिन धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ माह के मंगल का दिन बहुत महत्व रखता है, इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है। इस दिन बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को हर समस्या से छुटकारा मिल जाता है और इस दिन किए गए उपायों से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से भक्तों के सारे काम बनने लगते हैं। इस साल का पहला बड़ा मंगल 28 मई यानी आज पड़ रहा है, ऐसे में हनुमान जी की कृपा के लिए विधि-विधान से पूजा करें
हिंदू कैलेंडर अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और इसी दिन उन्हें ज्ञान भी…
पंचांग के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को होता है, ऐसे में इस साल आषाढ़…
वैशाख मास के शुल्क पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार मोहिनी एकादशी 19 मई को मनाई जा रही है। अगर इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और एकादशी का व्रत विधि विधान से किया जाए तो ये जातक को इतना फल देती है कि जीवन से कष्ट और दरिद्रता से मुक्ति मिल सकती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
अक्षय तृतीया के विषय में मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है उसमें बरकत होती है। यानी इस दिन जो भी अच्छा काम करेंगे उसका फल कभी समाप्त नहीं होगा अगर कोई बुरा काम करेंगे तो उस काम का परिणाम भी कई जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ेगा।
माना जाता है कि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है इसलिए जिसके घर में तुलसी मां की पूजा की जाती है जल चढ़ाया जाता है अथवा तो दीपक जलाया जाता है। उस पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है उसके घर में संपन्नता आती है। उसका घर सदैव खुशियों से भरा रहता है।
जग के नाथ अर्थात जगन्नाथ” कोई और नही बल्की स्वयं भगवान नारायण के 8 वे अवतार भगवान श्री कृष्ण ही है । द्वापर युग के बाद भगवान श्री कृष्ण पुरी में आकर वास करने लगे थे। जगन्नाथ पुरी भगवान के चार धामों में से एक धाम है। यहां पर भगवान श्री कृष्णा अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजे हुए हैं।
हिंदू पंचाग के अनुसार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन कामदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 18 अप्रैल, गुरुवार को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर शुरू हो चुका है, जिसका समापन आज यानी 19 अप्रैल को संध्याकाल 08 बजकर 04 मिनट पर होगा।
नवमी के दिन पूजी जाने वाली देवी मां सिद्धिदात्री का स्वरूप गौर, दिव्य और शुभता प्रदान करने वाला है। मां सिंह वाहन और कमल पर भी आसीन होती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं, दाहिने ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा और बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का फूल है। मां को बैंगनी और लाल रंग अतिप्रिय होता है। माना जाता है मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ और इन्हें अर्द्धनारीश्वर कहा गया।
