हरछठ यानि ललही छठ व्रत कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक ग्वालिन रहती थी। उसको जल्द ही बच्चा होने वाला था। एक तरफ वह प्रसव संबंधित परेशानियों से व्याकुल थी तो वहीं दूसरी तरफ उसका मन गोरस यानि दूध-दही बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि उसे प्रसव हो गया तो उसका गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा
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हलषष्ठी या ऊब छठ, इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था और उनका शस्त्र हल था इसलिए इस दिन को हलषष्ठी कहा जाता है. वहीं कई जगह इस दिन को चंदन षष्ठी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है
रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा रक्षा बंधन कहलाता है। यह पवित्र पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनके कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देते हैं।भाई-बहनों के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन 19 अगस्त को दिन सोमवार को मनाया जाएगा।
सनातन धर्म में एकदशी तिथि को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन एकादशी मनाई जाती है।
22 जुलाई 2024 से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन पहला सोमवार व्रत भी है। वहीं पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी, जो 3 अगस्त दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर समाप्त हो रही है।
कलियुग में मनुष्य के उद्धार के लिए एकादशी का व्रत सब व्रतों में उत्तम होता है इसके व्रत से सभी…
हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जातक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही जातक के जीवन में खुशियों के आगमन होता है।
ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी की भेंट हुई थी। अतः ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार पर बुढवा मंगल मनाया जाता है। हनुमान जी को संकट मोचन बाबा के नाम से भी जाना जाता है
ज्येष्ठ माह का तीसरा मंगलवार यानि तीसरा बड़ा मंगल 11 जून 2024 को है। बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है। इस दिन बजरंगबली की भक्ति करने वालों को सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है
गंगा दशहरा” हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो गंगा नदी की पूजा के लिए समर्पित है। यह त्योहार हिन्दू माह ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर गंगा की आकाश से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति की जाती है। भक्त नदी के किनारे एकत्र होते हैं, पवित्र स्नान करते हैं, रीति-रिवाज करते हैं और आशीर्वाद के लिए प्रार्थनाएं करते हैं। माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और इच्छाओं की पूर्ति होती है। यह त्योहार गंगा को संरक्षित और सुरक्षित रखने के महत्व को भी दर्शाता है,
