Browsing: प्रतिनिधि कविताएँ (पृष्ठ 92)

अंतिम ऊँचाई कुँवर नारायण कितना स्पष्ट होता आगे बढ़ते जाने का मतलब अगर दसों दिशाएँ हमारे सामने होतीं, हमारे…