केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) द्वारा तैयार उच्च शिक्षण संस्थानों की इंडिया रैंकिंग जारी की है।इसमें देश के टॉप 10 संस्थानों को चुना गया है जिसमें से 7 आईआईटी संस्थान है।
Author: Archana Dwivedi
भारत में चलने वाला इंटरनेट नेटवर्क एक ऐसा सिस्टम है जो पूरे देश में चलता है परंतु भारत का एक ऐसा राज्य भी है जिसने खुद की इंटरनेट सेवा शुरू की हैँ।यह राज्य कोई और नहीं बल्कि भारत का राज्य केरल है। जहां शांत घाटी (साइलेंट वैली ) स्थित है।
अरब सागर से आने वाला मानसून केरल में 1 जून को प्रवेश कर लेता था परन्तु इस बार यह 7 जून के बाद आने वाला है। आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवा में वृद्धि के साथ इसकी स्थितियां भी अनुकूल हो रही
यह पहली बार 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित किया गया था, और तब से 150 से अधिक देश इस दिन को मनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हैं।
मूंगदाल में कई पोषक तत्त्व पाए जाते है।इस दाल में विटामिन’ए’, ‘बी’, ‘सी’ और ‘ई’ की भरपूर मात्रा होती है। इसके साथ ही इसमें पॉटेशियम, आयरन, कैल्शियम मैग्नीशियम, कॉपर, फोलेट, फाइबर की मात्रा भी बहुत होती है, यही वजह है कि मूंगदाल शरीर को कई रोगों से बचाने में हेल्पफुल होती है
हींग और शहद दोनों ही भारतीय घरों की रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजें हैं। हींग ना सिर्फ खाने का स्वाद और सुगंध बढ़ाती है बल्कि सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। वहीं यदि हम बात शहद की करें तो वह भी कई औषधीय गुणों से परिपूर्ण पौष्टिक तत्वों से भरा हुआ होता है।
31 मार्च 2023 को डीएस चौहान के सेवानिवृत्त होने के बाद डीजी पुलिस भर्ती बोर्ड आरके विश्वकर्मा को कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उनके रिटायरमेंट के साथ आईपीएस विजय कुमार को कार्यवाहक डीजीपी की रूप में कमान दी गई है।
ऑनलाइन कंटेंट में तंबाकू उत्पाद या इसके इस्तेमाल को दिखाए जाने के दौरान प्रचार को कार्यक्रम के शुरू और बीच में भी कम से कम 30 सेकंड तक तंबाकू के खिलाफ स्वास्थ्य चेतावनी विज्ञापन जारी करना होगा। इसमें इसमें यह भी कहा गया है कि चेतावनी संदेश सफेद रंग के बैकग्राउंड पर काले रंग के अक्षरों से साफ लिखा होना चाहिए ताकि वह दर्शकों को सही से नजर आए।
लखनऊ की इस शानदार इमारत का निर्माण साल 1784 में किया गया था। जिसका निर्माण नवाब आसफुद्दौला द्वारा करवाया गया था। कई साल बीत जाने के बाद भी यह इमारत बाहर से जितनी आकर्षक है, अंदर से उतनी ही खूबसूरत भी है।
सत्यभामा भगवान श्री कृष्ण ले जाकर तराजू के पलडे़ पर बिठा दि। दूसरे पलड़े पर सत्यभामा ने अपने गहने को रखने लगीं। सत्यभामा के पास गहनों की कोई भी कमी नहीं थी सत्यभामा के पास बहुत सारे गहने थे। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण का पलड़ा भारी ही रहा
