Browsing: motivational

जैसा कि हम सभी जानते हैं, जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है। ऐसा समय आएगा जब हमें हार मानने का मन करेगा, लेकिन ऐसे समय में हमें अपने कारण को याद रखने की आवश्यकता है।

कहते हैं यदि लक्ष्य बड़ा है और उन्हें पाने की इच्छा है तो मेहनत करने से वह एक न एक दिन अवश्य प्राप्त होता है क्योंकि सपने वो नहीं होते हैं,जो हम सोते समय देखते हैं। सपने वह होते हैं जो आपको सोने ही नही देते है। जी हां दोस्तों आज हम आपसे बात करने वाले हैं एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में जिन्होंने सोचा था कुछ और था लेकिन उनकी जुनून की आंधी उनके उनके लक्ष्य की तरफ ले गई हम बात कर रहे हैं आईएएस ऑफिसर दीपक रावत की आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के सफर के बारे में….

सब्जी का ठेला लगाकर अपने परिवार की आर्थिक मदद करने वाले शिवाकांत कुशवाहा ने सिविल जज की परीक्षा ना सिर्फ पास की है बल्कि ओबीसी वर्ग में पूरे मध्य प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। अपनी मेहनत के दम पर अब सब्जी का ठेला लगाने वाला व्यक्ति जज की कुर्सी पर बैठकर अब न्याय करेगा।

हरियाणा के सिरसा जिले में डबवाली की रहने वाली एक गरीब परिवार की लड़की जब सब इंस्पेक्टर बनकर आई तो परिवार वालों की आंखों से आंसू निकल पड़े उनके लिए यह सफलता एक बहुत बड़ी सफलता थी जिसके मायने उनकी नजरों में अन्य लोगों से ज्यादा थे।

दादा साहब फाल्के का असली नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था। उनका जन्म 30 अप्रैल 1870  को महाराष्ट्र के नासिक में एक मराठी परिवार में हुआ था उनके पिता संस्कृत के एक महान विद्वान थे। दादा साहब ने अपनी शिक्षा महाराष्ट्र के भवन बड़ौदा में पूरी की वहां उन्होंने मूर्तिकला, इंजीनियरिंग, चित्रकला पेंटिंग और फोटोग्राफी की शिक्षा भी प्राप्त की।

जिस हीरे को भारत ने नहीं पहचाना उस हीरे को पहचान लिया अमेरिका ने और बना दिया उसे एक साधारण से असाधारण इंसान”

आपको बता दें कि या होनहार बालक कोई और नहीं बल्कि डॉ हरगोविंद खुराना थे । भारत अपने इस नगीने को समय रहते पहचान नहीं पाया मगर पश्चिम देश  ने इसकी प्रतिभा को पहचान लिया