अष्टमी तिथि के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात महागौरी की पूजा में श्वेत, लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें एवं सर्वप्रथम कलश पूजन के पश्चात मां की विधि-विधान से पूजा करें। देवी महागौरी को चंदन, रोली, मौली, कुमकुम, अक्षत, मोगरे का फूल अर्पित करें व देवी के सिद्ध मंत्र श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: का जाप करें।
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मान्यता है कि सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से भूत, प्रेत या बुरी शक्तियों से छुटकारा मिलता है और भय समाप्त होता है। जो भक्त निश्चल भाव से माता की पूजा करते हैं। श्रद्धा व भक्ति भाव से पूजा करने से कालरात्रि माता अपने भक्तों पर प्रसन्न होती है और उन्हें विशेष आशीर्वाद प्रदान करती हैं उनके जीवन को सुख समृद्धि और खुशियों से भर देती है।
नवरात्रि के छठे दिन मां का कात्यायनी की पूजा करने के लिए के लिए सुबह नहाने के बाद साफ वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प लेना चाहिए।मां कात्यायनी को पीला रंग प्रिय है इसलिए पूजा के लिए पीले रंग का वस्त्र धारण करना शुभ होता है।
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता कहलाता है। प्रेम और ममता…
नवरात्रि के चौथे दिन देवी मां के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मां भगवती के स्वरूप माता कुष्मांडा के अवतार की पूजा करना शुभदायक माना जाता है। माता का यह रूप अत्यंत परम शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता
नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्र के नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल से हुई थी। नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। नवरात्रि की तीसरे दिन मां भगवती के स्वरूप माता चंद्रघंटा का अवतार परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।
आज यानी 10 अप्रैल को नवरात्रि का दूसरा दिन है। वहीं इस दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा- अर्चना की जाती है। चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से शुरू हो गए हैं ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य है -‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या है और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली यानी तप का आचरण करने वाली देवी।
नवरात्रि की प्रतिदिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन सबसे पहले कलश स्थापना करके माता का आवाहन किया जाता है उसके पश्चात पूजा अर्चना आदि किया जाता है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।
इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या 8 अप्रैल 2024 को मनाई जा रही है। सोमवती अमावस्या पर मुख्य रूप से माता पार्वती और भोलेनाथ की पूजा की जाती है।
धार्मिक ग्रंथो में एकादशी का महत्व विशेष तौर पर माना गया है। एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा का माहात्म्य है।एकादशी पर व्रत और दान के साथ ही भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से हर तरह की परेशानियां और जाने-अनजाने में किए गए पाप खत्म हो जाते हैं।
