नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंद माता का विधि विधान से पूजन एवं अर्चन किया जाता है। स्कंदमाता की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आईये जानते हैं कि क्यों इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है और क्या है इनका पूजा करने का विधान? जिससे माता की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है और माता सदैव प्रसन्न रहती हैं। माता को स्कन्दमाता इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भगवान स्कन्द (कार्तिकेय / कुमार / मुरुगन) की माता हैं। विस्तार से कारण: 1. भगवान शिव और पार्वती की संतान –जब असुरों का अत्याचार बढ़ा और तारकासुर जैसे दानव को मारने के…
Author: Archana Dwivedi
अरथ / नाम: चंद्रघंटा = चन्द्र (चाँद) + घंटा (घंटी/घण्टा)। उनके माथे पर अर्धचंद्र के साथ घंटा जैसा भाव माना जाता है। स्वरूप: उनके चेहरे का भाव शांत दऔरयालु है, पर उनका रूप माता चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवार की देवी हैं। उनके तीसरे रूप में वे दह हाथ-ग्यारह हाथ/दस हाथ लिये दिखती हैं (ग्रंथों में भेद है) — जिनमें त्रिशूल, खड्ग/तलवार, गदा, धनुष-बाण, कमण्डल, त्रिशूल आदि होते हैं। सवारी: अक्सर माता चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवारमाता चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवार दिखाया जाता है — यह साहस और भय दूर करने का प्रतीक…
नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है।यह देवी माँ का तपस्विनी स्वरूप है, जिन्होंने भगवान शिव को पति स्वरूप पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इनका नाम “ब्रह्मचारिणी” इसलिए पड़ा क्योंकि ये ब्रह्म (तप, ज्ञान और व्रत) का आचरण करती हैं। ✨ स्वरूप और महत्व माता ब्रह्मचारिणी के दाएँ हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमंडलु होता है। ये तपस्या और संयम का प्रतीक हैं। इनकी उपासना से साधक को धैर्य, संयम और तपस्या की शक्ति प्राप्त होती है। छात्र, साधक और जीवन में कठिन साधनाएँ करने वाले विशेष रूप से इनकी कृपा…
स्वामी विवेकानंद, भारत के महान योगी और विचारक, अपनी जीवन यात्रा में हमेशा नए अनुभवों और शिक्षाओं की तलाश में रहते थे। एक बार उनकी यात्रा उन्हें राजस्थान के अजमेर ले गई। वहाँ का प्रसिद्ध घाट, जो लोगों के स्नान और ध्यान के लिए जाना जाता है, विवेकानंद के ध्यान और आत्मचिंतन का स्थल बन गया। घाट पर पहुँचते ही उन्होंने देखा कि वहाँ रोजाना बहुत भीड़ रहती है। कुछ लोग वहाँ स्नान करने आते हैं, कुछ खेलते हैं, और कुछ केवल हँसी-ठिठोली करते हैं। स्वामी जी ने घाट के किनारे शांत बैठे और ध्यान में लीन हो गए। थोड़ी…
नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।‘शैल’ का अर्थ है पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ है पुत्री। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण शैलपुत्री कहलाती हैं। माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल पुष्प होता है। वे वृषभ (बैल) पर विराजमान रहती हैं।माँ शैलपुत्री को सभी सिद्धियों और शक्तियों का मूल आधार माना जाता है। माँ शैलपुत्री की कथा पिछले जन्म में वे सती थीं और भगवान शिव की पत्नी बनीं।जब उनके पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया, तब सती ने यज्ञकुंड में कूदकर अपना देह…
नवरात्रि भारत के बहुत ही पवित्र त्यौहार है। यह देवी मां दुर्गा की आराधना का पर्व है। जैसा कि आप सब जानते हैं की नवरात्रि साल में दो बार आती है – चैत्र नवरात्रि ( मार्च और अप्रैल ) और शारदीय नवरात्रि ( सितंबर और अक्टूबर )इस बार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रही है और 1 अक्टूबर 2025 तक रहेगी। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त -: पंडितों के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। इस दिन माँ दुर्गा का स्वागत कलश स्थापना करके किया जाता है।तारीख – 22 सितम्बर 2025 (सोमवार)शुभ मुहूर्त – सुबह…
वसंत ऋतु छाई हुई थी। राजा कृष्णदेव राय बहुत ही खुश थे। वह तेनालीराम के साथ बाग में टहल रहे थे। वह चाह रहे थे कि एक ऐसा उत्सव मनाया जाए, जिसमें उनके राज्य के सारे लोग शामिल हों। पूरा राज्य उत्सव के आनंद में डूब जाए। इस विषय में वह तेनालीराम से भी राय लेना चाहते थे। तेनालीराम ने राजा की इस सोच की प्रशंसा की और इसके बाद राजा ने विजयनगर में राष्ट्रीय उत्सव मनाने का आदेश दे दिया। शीघ्र ही नगर को स्वच्छ करवा दिया गया, सड़कों व इमारतों में रोशनी की व्यवस्था कराई गई। पूरे नगर…
त्वचा (Skin) हमारे शरीर का सबसे बड़ा और संवेदनशील अंग है, जो न केवल हमें बाहरी वातावरण से सुरक्षित रखता है बल्कि हमारी सुंदरता और व्यक्तित्व का भी अहम हिस्सा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण, तनाव और असंतुलित खानपान का सीधा असर हमारी त्वचा पर पड़ता है। ऐसे में सही स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहद ज़रूरी हो जाता है। त्वचा की देखभाल क्यों ज़रूरी है? 1. स्वास्थ्य की पहचान – साफ और दमकती त्वचा हमारे अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है। 2. आत्मविश्वास बढ़ाती है – निखरी त्वचा से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्तित्व आकर्षक लगता है। 3. बचाव…
परिचय हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष स्थान है — यह चन्द्रमा की ग्यारवीं तिथि होती है, जब भगवान विष्णु की भक्ति, उपवास और आत्म-संयम के द्वारा शुद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। ‘इंदिरा एकादशी’ आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे पितृपक्ष की अवधि में भी माना जाता है। इस दिन पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त कराने और अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय और व्रत किए जाते हैं। तिथि एवं मुहूर्त इंदिरा एकादशी इस वर्ष 17 सितंबर 2025 को है, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में। एकादशी-तिथि लगभग रात के 12:22…
हर निर्माण के पीछे एक ज्ञान, कौशल और समर्पण छिपा होता है। विश्वकर्मा—वह दिव्य हस्ती जिनके हाथों से देवों के भवन, यंत्र और अस्त्र जन्म लेते हैं—उनके प्रति आदर स्वरूप मनाया जाने वाला पर्व ही विश्वकर्मा पूजा है। यह त्यौहार शिल्पकारों, कारीगरों, इंजीनियरों, मैकेनिकों और उन सभी का सत्कार है जो किसी न किसी रूप में बनाते-गढ़ते हैं। इस वर्ष कब मनाएं? (तारीख और समय) तिथि: इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2025 (बुधवार) को पड़ रही है। उपयुक्त समय (शुभ संकेत): सुबह-दोपहर के बीच पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है; कई स्थानों पर विजय-मुहूर्त दोपहर में आता है। सुझाव:…
