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तुलसी माता की पूजा की अनेक कथाएं प्रचलित है हम आपके यहां पर एक कथा स्वागत करने वाले हैं आईए जानते हैं कि क्या है तुलसी माता की पूजा की कथा-

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी पर गुरुवार को भगवान श्री हरि के जागने का पर्व देवोत्थानी एकादशी मनाया जाएगा जिसे देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है । इसके अलावा इसका दूसरा नाम श्री हरि प्रबोधिनी एकादशी भी है। यह एकादशी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन भगवान श्री हरि चार महीना के बाद अपने निद्रा अवस्था छोड़कर जागेंगे इसी दिन शालिग्राम और तुलसी जी का विवाह भी  होता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को माता सीता ने भी रखा था यह कथा उस समय की है जब रावण का वध करने के बाद भगवान श्री रामचंद्र की पहली बार अयोध्या आए तो माता सीता ने छठ का उपवास रखा था और उन्होंने सूर्य देव की पूजा अर्चना की थी

भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व छठ शुक्रवार को शुरू हो गया है इस नहाए खाए छठ पूजा में सूर्य भगवान के  उदय और अस्त दोनों रूपों में उनकी पूजा की जाती है उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इस पूजा में महिलाएं सात्विक भोजन करती है और घाटों पर जाकर पूजा वेदी बनाती हैं ।

यह सुनते ही राजा दक्ष ने शिव की निंदा भी प्रारंभ कर दी।यह सुनकर माता सती को बहुत दुख हुआ और उन्होंने योगाग्रि से अपने  पूरे शरीर को भस्म कर दिया। इसे देखकर वहां पर मौजूद सभी शिव गणों ने दक्ष के यज्ञ पर हमला कर दिया और देवताओं ने भी उन्हें भगा दिया । इसकी खबर जाकर शिव जी को दी गई यह सुनकर शिव को बहुत क्रोध आया।

इस बार प्रदोष व्रत महाशिवरात्रि से ठीक 1 दिन पहले पड़ रहा है । महाशिवरात्रि इस वर्ष 1 मार्च 2022 दिन मंगलवार को पड़ेगा आप भी यदि आप भी शिव जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि के पहले पड़ने वाले प्रदोष व्रत को अवश्य करें।