आज की रात्रि का आकाश एक अद्भुत और दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है। 7 सितम्बर 2025 को पूर्ण चंद्रग्रहण लग रहा है, जो भारत सहित अनेक देशों में दिखाई देगा। यह केवल वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ⏰ ग्रहण का समय आरंभ : रात्रि 9:58 बजे मध्य (पूर्ण अवस्था) : रात्रि 11:41 बजे समापन : प्रातः 1:26 बजे (8 सितम्बर) कुल अवधि : लगभग 3 घंटे 28 मिनट ग्रहण का ‘सूतक काल’ दोपहर 12:57 बजे से प्रारंभ होकर ग्रहण की समाप्ति तक प्रभावी रहेगा। चंद्रग्रहण…
Author: Archana Dwivedi
थट्टाचारी कृष्णदेव राय के दरबार में राजगुरु थे। वे तेनालीराम से बहुत ईर्ष्या करते थे। उन्हें जब भी मौका मिलता तो वे तेनालीराम के विरुद्ध राजा के कान भरने से नहीं चूकते थे।एक बार क्रोध में आकर राजा ने तेनालीराम को मृत्युदंड देने की घोषणा कर दी, परंतु अपनी विलक्षण बुद्धि और हाजिरजवाबी से तेनालीराम ने जीवन की रक्षा की। एक बार तेनालीराम ने राजा द्वारा दी जाने वाली मृत्युदंड की धमकी को हमेशा के लिए समाप्त करने की योजना बनाई। वे थट्टाचारी के पास गए और बोले, ‘महाशय, एक सुंदर नर्तकी शहर में आई है। वह आपके समान किसी…
1. चंद्र ग्रहण का कारण जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। यह केवल पूर्णिमा की रात को ही हो सकता है। चंद्र ग्रहण के प्रकार पूर्ण चंद्र ग्रहण – जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाए। आंशिक चंद्र ग्रहण – जब चंद्रमा का कुछ भाग ही छाया में हो। उपछाया चंद्र ग्रहण – जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया (Penumbra) में प्रवेश करता है। 3. वैज्ञानिक महत्व यह हमें खगोलीय पिंडों की गति और उनकी स्थिति को समझने में मदद करता है।…
शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) भारत में हर साल 5 सितम्बर को मनाया जाता है। इसके पीछे एक विशेष कारण है। शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है? शिक्षक समाज का मार्गदर्शन करने वाले दीपक होते हैं। वे केवल ज्ञान ही नहीं देते बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा भी दिखाते हैं। उनके सम्मान और आभार प्रकट करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 5 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है? इस दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan) का जन्म हुआ था। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षक और विद्वान थे। जब वे राष्ट्रपति बने…
एकादशी का व्रत प्रमुख रूप से भगवान विष्णु के लिए रखा जाता है। हिंदू धर्म में भगवान श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए किसी भी महीने के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. श्री हरि की कृपा बरसाने वाली एकादशी का महत्व तब और ज्यादा बढ़ जाता है जब यह भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष में पड़ती है और परिवर्तनी या फिर जलझूलनी एकादशी कहलाती है. इस साल परिवर्तनी एकादशी का व्रत कब पड़ेगा और इसकी किस विधि से पूजा करनी चाहिए? पूजा विधि से लेकर शुभ मुहूर्त तक, सभी जरूरी बातों…
भारत और चीन के संबंध हमेशा से जटिल और बहुआयामी रहे हैं। कभी व्यापारिक साझेदारी, तो कभी सीमा विवाद—इन रिश्तों में उतार-चढ़ाव की लंबी कहानी है। अगस्त–सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। यह यात्रा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के अवसर पर हुई और इसे पिछले सात वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की सबसे अहम चीन यात्रा माना जा रहा है। 1. सीमा प्रबंधन और विश्वास बहाली मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सबसे अहम चर्चा सीमा पर शांति और स्थिरता को लेकर रही। दोनों नेताओं…
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते परिदृश्य में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक ऐसा मंच बन चुका है जो एशिया की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को एक साथ लाता है। वर्ष 2025 में चीन के तियानजिन शहर में आयोजित यह बैठक न केवल संगठन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा। संगठन का परिचय शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। A मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है। वर्तमान में इसके 10 सदस्य राष्ट्र…
एक बार की बात है, एक छोटा-सा गाँव था। गाँव के बाहर एक पेड़ पर चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया हुआ था।एक दिन बहुत तेज़ तूफ़ान आया। पेड़ की शाखाएँ हिलने लगीं और घोंसला टूटकर ज़मीन पर गिर गया। चिड़िया उदास हो गई। उसे लगा कि अब उसका सब कुछ ख़त्म हो गया है। तभी पास खड़ा एक कौवा बोला –“अरे चिड़िया! तू इतनी छोटी है और बार-बार घोंसला बनाकर क्या पाएगी? हर बार तूफ़ान आकर उसे उड़ा देगा। छोड़ दे ये कोशिशें।” चिड़िया ने मुस्कुराकर कहा –“तूफ़ान मेरा घोंसला तोड़ सकता है,लेकिन मेरा हौसला नहीं तोड़ सकता।जब तक साँस…
जैन धर्म अनादि अनंत और शाश्वत धर्म है यह बात आज की युग में सभी जानते हैं इस युग में इसके प्रथम प्रवर्तक अर्थात तीर्थंकर भगवान आदि देव माने जाते हैं। जैन धर्म में तीन बड़े त्यौहार विशेष तौर पर मनाया जाते हैं। जैन परंपरा में पर्युषण और दशलक्षण महापर्व त्याग, संयम और आत्मचिंतन का पर्व है। यह ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो हमें ‘जियो और जीने दो’ का संदेश देता है। पर्व का नाम आते ही हमारे मन में रंग-बिरंगे उत्सव, मिठाइयों और मेलों का चित्र उभर आता है। लेकिन जैन परंपरा में पर्युषण और…
ऋषि पंचमी व्रत भाद्रपद मास (भादों) शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को किया जाता है। यह तिथि गणेश चतुर्थी के अगले दिन आती है। इस व्रत का उल्लेख प्राचीन पुराणों जैसे गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण, भागवत पुराण आदि में मिलता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और आज भी महिलाएँ एवं पुरुष दोनों ही इस व्रत को श्रद्धा से करते हैं। ऋषि पंचमी व्रत क्यों किया जाता है? 1. मान्यता है कि अशुद्धि, अनजाने में हुए दोष, मासिक धर्म काल में हुई त्रुटियों के प्रायश्चित के लिए यह व्रत किया जाता है। 2. यह व्रत सप्तऋषियों…
