Author: Archana Dwivedi

I’m Archana Dwivedi - a dedicated educator and founder of an educational institute. With a passion for teaching and learning, I strive to provide quality education and a nurturing environment that empowers students to achieve their full potential.

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था जिसका नाम उत्तंक था। वह बहुत ही धार्मिक और वेदों के ज्ञाता थे। एक दिन, वह अपनी पत्नी के साथ एक यज्ञ में भाग लेने के लिए गया। वहाँ, उन्होंने देखा कि यज्ञ के लिए एक गाय की बलि दी जा रही है। उत्तंक को यह देखकर बहुत दुःख हुआ और उन्होंने सोचा कि यह कैसे धर्म हो सकता है।

Read More

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र व कर्नाटक में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था।गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है।

Read More

सनातन धर्म में कुंवारी लड़कियों और सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। यह व्रत निर्जला किया जाता है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।

Read More

एक वक्त था जब दीप्ति जीवनजी को उनके ही गांव वाले मेंटल मंकी कहकर चिढ़ाते थे, लेकिन गर्व कर रहे होंगे। इस महिला एथलीट ने पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता और देश को गौरवान्वित किया।

Read More

आज सर्च इंजन गूगल 25 साल का हो गया है। गूगल इस खास मौके को डूडल बनाकर सेलिब्रेट कर रहा है। वहीं, कंपनी के CEO सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा, ‘हैप्पी 25 बर्थडे गूगल!

Read More

एक बार राजा अकबर का दरबार लगा था। बीरबल के साथ ही सभी मंत्रीगण बैठे थे। अकबर की आदत थी कि वे बीरबल की परीक्षा लेते रहते थे। ऐसा करने में उन्हें आनंद आता था।’ अकबर ने एकाएक बीरबल से पूछा लिया, ‘ऐसी लाइन बताओ, जिसे कोई इनसान सुख में पढ़ें, तो उसे दुख हो और वहीं लाइन दुख में पढ़ें, तो सुख मिले।’ बीरबल ने एक पल सोचा और जवाब दे दिया। बीरबल ने कहा, ‘जहांपनाह, वो लाइन है- यह वक्त भी गुजर जाएगा।’ बीरबल ने समझाया कि यह लाइन उस इनसान के लिए भी है, जिसका वक्त अभी…

Read More

महाराणा प्रताप सिंह ने जम्मू कश्मीर पर 1885 से 1925 तक शासन किया था। वह अपनी प्रजा के दुख- दर्द  जानने के लिए वेश बदलकर घूमा करते थे। वह एक दिन घूमते घूमते किसी तालाब के पास पहुंचे। वहां उन्होंने एक युवक को लेटा हुआ देखा। बुखार से उसका शरीर तप रहा था। महाराज के पूछने पर उसने बताया मैं अपनी पत्नी को लिवाने जम्मू जा रहा हूं। मैं लक्ष्मी मेहतरानी जमाई हूं। राजा ने उसे घोड़े पर बैठ जाने को कहा ,पर वह इतना कमजोर हो चुका था कि घोड़े पर चढ़ नहीं सका। तब महाराज ने उसे अपने…

Read More

हरछठ यानि ललही छठ व्रत कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक ग्वालिन रहती थी। उसको जल्द ही बच्चा होने वाला था। एक तरफ वह प्रसव संबंधित परेशानियों से व्याकुल थी तो वहीं दूसरी तरफ उसका मन गोरस यानि दूध-दही बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि उसे प्रसव हो गया तो उसका गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा

Read More

हलषष्ठी या ऊब छठ, इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था और उनका शस्त्र हल था इसलिए इस दिन को हलषष्ठी कहा जाता है. वहीं कई जगह इस दिन को चंदन षष्ठी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है

Read More

उन्होंने “जागो तुम्हारे भीतर की शक्ति को” और “उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” जैसे प्रेरक वाक्य दिए

Read More