Author: Archana Dwivedi

Archana Dwivedi

I’m Archana Dwivedi - a dedicated educator and founder of an educational institute. With a passion for teaching and learning, I strive to provide quality education and a nurturing environment that empowers students to achieve their full potential.

सनातन धर्म में कुंवारी लड़कियों और सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का विशेष महत्व है। यह व्रत निर्जला किया जाता है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है।

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एक वक्त था जब दीप्ति जीवनजी को उनके ही गांव वाले मेंटल मंकी कहकर चिढ़ाते थे, लेकिन गर्व कर रहे होंगे। इस महिला एथलीट ने पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता और देश को गौरवान्वित किया।

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आज सर्च इंजन गूगल 25 साल का हो गया है। गूगल इस खास मौके को डूडल बनाकर सेलिब्रेट कर रहा है। वहीं, कंपनी के CEO सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा, ‘हैप्पी 25 बर्थडे गूगल!

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एक बार राजा अकबर का दरबार लगा था। बीरबल के साथ ही सभी मंत्रीगण बैठे थे। अकबर की आदत थी कि वे बीरबल की परीक्षा लेते रहते थे। ऐसा करने में उन्हें आनंद आता था।’ अकबर ने एकाएक बीरबल से पूछा लिया, ‘ऐसी लाइन बताओ, जिसे कोई इनसान सुख में पढ़ें, तो उसे दुख हो और वहीं लाइन दुख में पढ़ें, तो सुख मिले।’ बीरबल ने एक पल सोचा और जवाब दे दिया। बीरबल ने कहा, ‘जहांपनाह, वो लाइन है- यह वक्त भी गुजर जाएगा।’ बीरबल ने समझाया कि यह लाइन उस इनसान के लिए भी है, जिसका वक्त अभी…

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महाराणा प्रताप सिंह ने जम्मू कश्मीर पर 1885 से 1925 तक शासन किया था। वह अपनी प्रजा के दुख- दर्द  जानने के लिए वेश बदलकर घूमा करते थे। वह एक दिन घूमते घूमते किसी तालाब के पास पहुंचे। वहां उन्होंने एक युवक को लेटा हुआ देखा। बुखार से उसका शरीर तप रहा था। महाराज के पूछने पर उसने बताया मैं अपनी पत्नी को लिवाने जम्मू जा रहा हूं। मैं लक्ष्मी मेहतरानी जमाई हूं। राजा ने उसे घोड़े पर बैठ जाने को कहा ,पर वह इतना कमजोर हो चुका था कि घोड़े पर चढ़ नहीं सका। तब महाराज ने उसे अपने…

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हरछठ यानि ललही छठ व्रत कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक ग्वालिन रहती थी। उसको जल्द ही बच्चा होने वाला था। एक तरफ वह प्रसव संबंधित परेशानियों से व्याकुल थी तो वहीं दूसरी तरफ उसका मन गोरस यानि दूध-दही बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि उसे प्रसव हो गया तो उसका गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा

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हलषष्ठी या ऊब छठ, इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था और उनका शस्त्र हल था इसलिए इस दिन को हलषष्ठी कहा जाता है. वहीं कई जगह इस दिन को चंदन षष्ठी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है

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उन्होंने “जागो तुम्हारे भीतर की शक्ति को” और “उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” जैसे प्रेरक वाक्य दिए

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रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा रक्षा बंधन कहलाता है। यह पवित्र पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनके कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देते हैं।भाई-बहनों के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन 19 अगस्त को दिन सोमवार को मनाया जाएगा।

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